God and Godesses Aarti Collection in Hindi

श्री गणेश आरती हिंदी में
Shree Ganesh Aarti

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।

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श्री शिव आरती हिंदी में
Shree Shiv Aarti

ॐ जय शिव ओंकारा ,प्रभु हर ॐ शिव ओंकारा |ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।

श्री राम आरती हिंदी में
Shree Ram Aarti

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्। नव कंज लोचन।

श्री हनुमान आरती हिंदी में
Shree Hanuman Aarti

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

श्री विष्णु आरती हिंदी में
Shree Vishnu Aarti

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट।

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श्री कृष्णा आरती हिंदी में
Shree Krishna Aarti

ओम जय श्री कृष्ण हरे,प्रभु जय श्री कृष्ण हरे,भक्तन के दुख सारे पल में दूर करे।

श्री ब्रह्मा आरती हिंदी में
Shree Brahma Aarti

पितु मातु सहायक स्वामी सखा , तुम ही एक नाथ हमारे हो। जिनके कुछ और आधार नहीं ।

श्री कुबेर चालीसा हिंदी में
Shree Kuber Aarati

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे , स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भगतों के।

श्री शनि आरती हिंदी में
Shree Shani Aarti

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी।

श्री भैरव आरती हिंदी में
Shree Bhairav Aarti

सुनो जी भैरव लाड़िले,कर जोड़ कर विनती करुं । कृपा तुम्हारी चाहिये, मैं ध्यान तुम्हरा ही धरूं ।

श्री सूर्य आरती हिंदी में
Shree Surya Aarti

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन।

श्री नवग्रह आरती हिंदी में
Shree Navgrah Aarti

आरती श्री नवग्रहों की कीजै. बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै । सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर।

श्री खाटू श्याम आरती हिंदी में
Shree Khatushyam Aarti

ॐ जय श्री श्याम हरे, प्रभु जय श्री श्याम हरे। निज भक्तन के तुमने पूरन काम करे।

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श्री लक्ष्मी आरती हिंदी में
Shree Laxmi Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।

श्री महालक्ष्मी आरती हिंदी में
Shree Mahalaxmi Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।

श्री दुर्गा आरती हिंदी में
Shree Durga Aarti

ॐ जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी ,तुमको निशदिन ध्यावत हरी ब्रह्मा शिवजी।

श्री विन्धयेस्वरी आरती हिंदी में
Shree Vindheswari Aarti

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, कोई तेरा पार ना पाया ।पान सुपारी ध्वजा नारियल।

श्री सरस्वती आरती हिंदी में,
Shree Saraswati Aarti

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता।

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श्री गायत्री आरती हिंदी में
Shree Gayatri Aarti

जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता।

श्री काली आरती हिंदी में
Shree Kali Aarti

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली । तेरे ही गुण गायें भारती।

श्री महाकाली आरती हिंदी में
Shree Mahakali Aarti

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा ,हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा ।

श्री शीतला आरती हिंदी में
Shree Sheetla Aarti

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता, आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता।

श्री राधा आरती हिंदी में
Shree Radha Aarti

आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की।। त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि।

श्री तुलसी आरती हिंदी में
Shree Tulsi Aarti

जय जय तुलसी माता, सब जग की सुखदाता । ॥जय जय तुलसी माता।

श्री वैष्णो आरती हिंदी में
Shree Vaishno Aarti

जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता।

श्री संतोषी माता आरती हिंदी में
Shree Santoshi Mata Aarti

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता । अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ।

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श्री माँ अन्नपूर्णा आरती हिंदी में
Shree Annapurna Aarti

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो नहीं ध्यावै तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।

श्री पार्वती आरती हिंदी में
Shree Parvati Aarti

जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्म सनातन देवी शुभफल की दाता ।

श्री गंगा आरती हिंदी में
Shree Ganga Aarti

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।

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श्री नर्मदा आरती हिंदी में
Shree Narmada Aarti

ॐ जय जगदानन्दी,मैया जय आनन्द कन्दी । ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा शिव ।

श्री शारदा आरती हिंदी
Shree Sharda Aarti

भुवन विराजी शारदा,महिमा अपरम्पार। भक्तों के कल्याण को धरो मात अवतार ।

श्री कामधेनु माता आरती हिंदी में
Shree Kamadhenu Mata Aarti

आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्‍व धैय्या की, अर्थकाम सुद्धर्म ।

आरती श्रीमद्भागवतमहापुराण की
Aarati Shree Madbhaagawat Mahapuran Ki

आरती अतिपावन पुरान की । धर्म-भक्ति-विज्ञान-खान की ॥ महापुराण भागवत निर्मल । शुक-मुख-विगलित निगम-कल्प-फल ॥